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ज़िन्दगी में वक़्त से ज्यादा

ज़िन्दगी में वक़्त से ज्यादा
अपना या पराया कोई नहीं होता है
वक़्त अपना होता है
तो सब अपने होते हैं
और वक़्त पराया होता है
तो अपने भी पराये हो जाते हैं।

कुछ उलझनों के हल
वक्त पर छोड़ देने चाहिए
बेशक जवाब देर से मिलेंगे
लेकिन बेहतरीन होंगे ।

जिंदगी ने
सवाल बदल डाले,
वक्त ने
हालात बदल डाले,
हम तो आज भी वही हैं
जो कल थे,
बस लोगों ने
अपने जज्बात बदल डाले ।

इच्छाएँ सपने,उम्मीदें और नाखून
इन्हें समय-समय पर काटते रहें,
अन्यथा ये दुखःका कारण बनते हैं……!!!

कल शीशा था, सब देख कर जाते थे ।
आज टूट गया,
सब बच-बच कर जाते हैं ।
ये वक़्त है, साहब
दिन सबके आते हैं ।

खुदकुशी हमेशा
जिस्म ही नहीं करते जनाब
वक़्त की दहलीज पर
हजारों ख्वाहिशें यूँ ही झूल जाती हैं ।

बस यही दो मसले,
ज़िन्दगी भर ना हल हुए,
ना नींद पूरी हुई, ना
ख्वाब मुकम्मल हुए,
वक्त ने कहा,
काश थोड़ा और सब्र होता,
सब्र ने कहा,
काश थोड़ा और
‘वक़्त होता ।

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