सुविचार

ज़िन्दगी भी इसी तरह है

नदी का पानी मीठा होता है
क्योंकि वो देती रहती है
सागर का पानी खारा होता है
क्योंकि वो लेता रहता है
ज़िन्दगी भी इसी तरह है
देते रहेंगे मीठे लगेंगे
और
लेते रहेंगे खारे लगेंगे।

कहीं मिलेगी प्रशंसा तो,
कहीं नाराजगियों का बहाव मिलेगा..
कहीं मिलेगी दुआ.. तो,
कहीं भावनाओं में दुर्भाव मिलेगा..
तू चलाचल राही अपने कर्मपथ पे,
जैसा तेरा भाव’ वैसा ‘प्रभाव’ मिलेगा ।

जरुरी नहीं कि हर समय
लबों पर खुदा का नाम आये,
वो लम्हा भी इबादत का होता है
जब इंसान किसी के काम आये ।

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