सुविचार

क्रोध की स्थिति में सच

खौलते हुये पानी में जिस तरह
प्रतिबिंब नहीं देखा जा सकता,
उसी तरह क्रोध की स्थिति में
सच नहीं देखा जा सकता है।

किसी ज्ञानी आदमी से जब किसी ने यह सवाल किया कि
इंसान से सबसे बड़ी दुश्मनी कौन निभाता है,?
तो महापुरुष ने जबाब दिया –
” गुस्सा उसका सबसे बड़ा शत्रु है,
जिसे बिना नुकसान के नियंत्रण करना बहुत कठिन होता है।”

आइये पढ़ते है, इंसान के सबसे बड़े इस शत्रु पर कुछ महापुरुष क्या कहते हैं…

“क्रोध वह तेज़ाब है,
जो किसी भी चीज पर,
जिस पर वह डाला जाये,
से ज्यादा उस पात्र को अधिक हानि पहुँचा सकता है,
जिसमे वह रखा है” ****मार्क ट्वेन

“क्रोध वो हवा है, जो बुद्धि का दीप बुझा देती है” **** रॉबर्ट ग्रीन इन्गे सोर्ल

“क्रोध को पाले रखना
गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से
पकड़े रहने के समान है,
इससे आप ही जलते हैं”
***** भगवान गौतम बुद्ध

“हर एक मिनट जिसमें आप क्रोधित रहते हैं,
आप 60 सेकेण्ड की मन की शांति खोते हैं” ***** रॉल्फ वाल्डो इमर्सन

इसके अलावा दोस्तों, भगवान श्री कृष्ण ने गीता के अध्याय 2 श्लोक 63 में क्रोध पर कहा है…
क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम: ।
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ।। 2-63 ॥
( क्रोध से अत्यंत मूढ़ भाव उत्पन्न हो जाता है,
मूढ़ भाव से स्मृति में भ्रम हो जाता है,
स्मृति में भ्रम हो जाने से बुद्धि
अर्थात ज्ञानशक्ति का नाश हो जाता है
और बुद्धि का नाश हो जाने से
मानव अपनी स्थिति से गिर जाता है।)

सन्त कबीर दास जी ने क्रोध पर सही चिंतन धारा दी, उस पर एक नजर डालते है ।
जहाँ दया वहां धर्म है, जहाँ लोभ तहाँ पाप ।
जहाँ क्रोध वहाँ काल है, जहाँ क्षमा वहाँ आप ।

क्रोध की विभिन्न किस्म होती है,
तदनुसार उसका रुप भी अलग अलग नाम से जाना जाता है।
गुस्सा, द्वेष, बदला, आघात, आक्रमण, ईर्ष्या, रौद्र, भयंकर, आदि स्वरुप क्रोध परिवार के सदस्य है।

Tags
Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close