सुविचार

नजर का आपरेशन

नजर का आपरेशन तो सम्भव है,
पर नजरिये का नही ।
फर्क सिर्फ सोच का होता है वरना;
जो सीढ़ियाँ ऊपर जाती हैं,वही नीचे भी आती हैं ।

किसी ने मुझसे कहा कि
तुम इतना ख़ुश कैसे रह लेते हो?
तो मैंने कहा कि मैंने ज़िन्दगी की गाड़ी से
वो साइड ग्लास ही हटा दिये
जिसमें पीछे छूटते रास्ते और
बुराई करते लोग नजर आते थे।

चढ़ता है नज़रों में शख्स तो
बस अपने किरदार से
यूँ किसी इंसान की
इज़्ज़त नहीं होती।

नेत्र केवल दृष्टि प्रदान
करते है
परंतु हम कहाँ क्या देखते हैं
यह हमारे मन की भावना
पर निर्भर है ।

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