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छोटी-छोटी बातों में आनंद

छोटी-छोटी बातों में आनंद खोजिए

छोटी-छोटी बातों में;
आनंद खोजना चाहिए,
क्योंकि बड़ी-बड़ी बातें तो;
जीवन में कुछ ही होती हैं।

छोटी-छोटी खुशियों को;
पूरे मन से और जोश से मनाएँ,
इससे जीवन में उत्साह बना रहता है ।


यदि किसी भूल के कारण;
कल का दिन दु:ख में बीता है;
तो उसे याद कर आज का दिन;
व्यर्थ में न बर्बाद करो।
स्वामी विवेकानंद
यह आवश्यक नहीं कि;
हर लड़ाई जीती ही जाए।
आवश्यक तो यह है कि;
हर हार से कुछ सीखा जाए।

कभी पीठ पीछे आपकी बात चले तो;
घबराना नहीं;
क्योंकि बात तो उन्हीं की होती है;
जिनमें वाकई कोई बात होती है।
कर्मों की आवाज शब्दों से भी ऊँची होती है।

गलती उसी से होती है;
जो काम करता है;
निकम्मों की जिंदगी तो;
दूसरों की बुराई खोजने में ही;
ख़त्म हो जाती है।
बात मन में दबाए न रखें;
व्यर्थ में चिंता बढेगी।
मनोभावों को शांत-सहज भाव में व्यक्त करें;
बिगड़ी बात बन जाएगी।

जीवन में परेशानियाँ;
चाहे जितनी भी हों,
चिंता करने से;
और बड़ी हो जाती हैं,
खामोश होने से;
काफी कम हो जाती हैं,
सब्र करने से;
खत्म हो जाती हैं,
और;
परमात्मा का शुक्र करने से;
खुशियों में बदल जाती हैं ।
विनम्रता पूर्वक व्यवहार करें,
कुंठा से बचें,
क्योंकि इससे हम आक्रामक बनते हैं;
और अवसाद में चले जाते हैं ।
जहाज समंदर के किनारे सर्वाधिक सुरक्षित रहता है,
मगर क्या आप नहीं जानते कि;
उसे किनारे के लिए नहीं;
बल्कि समंदर के बीच में जाने के लिए बनाया गया है ?
कार्य व्यवहार में ‘क्यों’ को ‘क्यों नहीं’ में
बदलने की कला सीखिए
सकारात्मक सोच
हमेशा प्रगति की ओर जाती है ।
हमेशा छोटी-छोटी गलतियों से
बचने की कोशिश करनी चाहिए,
क्योंकि इन्सान पहाड़ों से नहीं
पत्थरों से ही ठोकर खाता है ।

जब तालाब भरता है;
तब मछलियाँ चीटियों को खाती हैं;
और जब तालाब सूखने लगता है;
तब चीटियाँ मछलियों को खाती हैं;
यानि प्रकृति सभी को;
कभी न कभी मौका जरूर देती है;
बस अपनी बारी का इंतजार करो।
किसी शांत और विनम्र व्यक्ति से
अपनी तुलना करके देखिए,
आपको लगेगा कि,
आपका घमंड निश्चय ही जैसा है।

समस्या के बारे में
सोचने से बहाने मिलते हैं,
समाधान के बारे में सोचने पर
रास्ते मिलते हैं।