सुविचार

सच और झूठ

जब तक सच जूते पहन रहा होता है
तब तक
एक झूठ आधी दुनिया का सफ़र तय कर सकता है ।

सच को तमीज नहीं बात करने की,
झूठ को देखो कितना मीठा बोलता है ।

झूठ इसलिए बिक जाता है कि,
क्योंकि;
सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती है ।

सत्य की भूख सभी को लगती है,
लेकिन जब सत्य परोसा जाता है,
तो बहुत कम लोगों को;
इसका स्वाद अच्छा लगता है ।

सत्य की राह पर चलने का सबसे बड़ा मजा ये होता है कि आपको भीड़ नही मिलती।
इसलिए आनंद लीजिये शातिपूर्ण मार्ग का क्योंकि इस राह पर कोई ट्राफिक नही।

दुनिया के हर इंसान को;
नफरत है झूठ से,
मैं परेशान हूँ ये सोच कर;
फिर ये झूठ बोलता कौन है ।




झूठ बोलना पहली बार
आसान हो सकता है, पर बाद में परेशानी देता है,
सच बोलना पहली बार कठिन होता है;
पर बाद में सुकून और आराम देता है ।

झूठ का भी
अजीब जायका है;
स्वयं बोलो तो
मीठा लगता है और;
कोई दूसरा बोले तो
कड़वा लगता है ।

झूठ की रफ़्तार भले ही तेज हो
पर सच आगे निकल जाता है ।

सच दो टूक में पर झूठ घुमा फिर कर अपनी बात करता है ।

सच उथले में नहीं बल्कि काई से ढके गहरे तालाब में रहता है ।

सच की डोर भले लम्बी हो पर उसे कोई तोड़ नहीं सकता है ।

झूठ की उम्र छोटी पर जबान लम्बी होती है ।

एक झूठ छिपाने दस झूठ का सहारा लेना पड़ता है ।

सच और गुलाब सदैव काँटों से घिरे रहते हैं ।

झूठ से भरा जहाज मंझधार में डूबता है ।

सत्य परास्त तो हो सकता है पर कभी पराजित नहीं होता है ।

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सच का नकाब

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