सुविचार

क्रोध में बोला एक शब्द

क्रोध में बोला एक कठोर शब्द;
इतना जहरीला बन सकता है कि,
आपकी हज़ार प्यारी बातों को
एक मिनट में नष्ट कर सकता है ।

न तेरी शान कम होती 
न रुतबा ही घटा होता, 
जो गुस्से में कहा तुमने 
वही हँस के कहा होता।

क्रोध में चिल्लाने के लिये
ताकत नहीं चाहिए
मगर क्रोध आने पर
चुप रहने के लिए बहुत ताकत चाहिए ।

क्रोध करने का मतलब
दूसरों की गलतियों की सजा
स्वयं को देना है ।

क्रोध में थोड़ा
रुक जाईये और
गलती में थोड़ा
झुक जाइए,
देखिए हर समस्या का
समाधान हो जायेगा ।

जब आदमी जिद करता है
तब क्रोध जन्म लेता है ।
क्रोध से अहंकार पैदा होता है ।
अहंकार से ईर्ष्या उत्पन्न होती है ।
ईर्ष्या हिंसा को बढ़ावा देती है ।
इसलिए न जिद करें और
न क्रोध को पैदा करें ।

यदि आप हमेशा गुस्सा और
शिकायत करते हैं तो
लोगों के पास आपके लिए
समय नहीं होगा ।

जब कोई आपके सामने गुस्से में बात करे,
तो उसे ख़ामोशी के साथ गौर से सुनिए,
क्योंकि गुस्से में इन्सान अक्सर सच बोलता है ।

यह सही है कि इन्सान को
गुस्सा नहीं करना चाहिए,
पर जो इन्सान अधिक गुस्सा करते हैं,
प्यार भी उतना ही अधिक करते हैं,
क्योंकि लाल रंग खतरे का निशान है
तो प्यार की निशानी भी है ।

गुस्सा बहुत चतुर होता है,
हमेशा कमजोर पर ही निकलता है ।

मनुष्य सुबह से शाम तक
काम करके उतना नहीं थकता है
जितना क्रोध और चिंता से
एक क्षण में थक जाता है ।

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