सुविचार

अपनों में रहें, अपने में नही

अपनों को
हमेशा अपना होने का अहसास दिलाओ
वरना वक़्त आपके अपनों को
आपके बिना जीना सिखा देगा ।

किसी ने क्या खूब लिखा है
“वक्त” निकालकर “बातें” कर लिया करो “अपनों से”
अगर “अपने ही” न रहेंगे तो “वक़्त‘ का क्या करोगे ।

अपनाने के लिए
हजार खूबियाॅ भी कम हैं
और छोड़ने के लिए
एक कमी ही काफी है।

दुनिया में
कोई भी चीज़ अपने आपके लिए
नहीं बनी है।
जैसे: दरिया
खुद अपना पानी नहीं पीता।
पेड़ –
खुद अपना फल नहीं खाते।
सूरज –
अपने लिए हर रात नहीं देता।
फूल –
अपनी खुशबु
अपने लिए नहीं बिखेरते।

किसी से अपने जैसे
होने की उम्मीद मत रखिए
क्योंकि आप अपने सीधे हाथ में
किसी का सीधा हाथ पकड़ कर
कभी नहीं चल सकते
किसी के साथ चलने के लिए
उसका उल्टा हाथ ही
पकड़ना पड़ता है
तभी साथ चला जा सकता है ।
यही जीवन है ।

apno se utna rootho

अपनों से उतना रूठो कि
आपकी ‘बात‘ और सामने वाले की ‘इज्जत’
बरकरार रहे.

“ना तुम अपने आप को गले लगा सकते हो,
ना ही तुम अपने कंधे पर सर
रखकर रो सकते हो !
एक दूसरे के लिये जीने का नाम ही जिंदगी है ।
इसलिये वक़्त उन्हें दो जो तुम्हे चाहते हों दिल से ।

होश का पानी छिड़को मदहोशी की आँखों पर,
अपनों से ना उलझो गैरों की बातों पर….!

किसी को अपना बनाना हुनर ही सही
किसी का बन के रहना कमाल होता है ।

दर्द तो वही देते हैं जिन्हें आप
अपना होने का हक देते हैं
वरना गैर तो हल्का सा धक्का लगने पर भी
माफी मांग लिया करते हैं ।

अपनों पर भी उतना ही विश्वास रखो
जितना दवाईयों पर रखते हो,
बेशक थोड़े कड़वे होंगे लेकिन
आपके फायदे के लिए होंगे ।

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