सुविचार

आदमी के शब्द

आदमी के शब्द नहीं
वक़्त बोलता है ।

चढते सूरज के
पुजारी तो लाखों हैं
डूबते वक़्त हमने
सूरज को भी तन्हा देखा है।

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