सुविचार

आदमी के शब्द

आदमी के शब्द नहीं
वक़्त बोलता है ।

शब्द शब्द बहु अंतरा, शब्द के हाथ न पाव
एक शब्द करे औषधि, एक शब्द करे घाव ।।

शब्द सम्भाले बोलिए, शब्द खींचते ध्यान
शब्द मन घायल करे, शब्द बढ़ाते मान ।।
शब्द मुँह से छूट गया, शब्द न वापस आय ।
शब्द जो हो प्यार भरा, शब्द ही मन में समाए ।।
शब्द में है भाव रंग का, शब्द है मान महान ।
शब्द जीवन रुप है, शब्द ही दुनिया जहान ।।
शब्द ही कटुता रोप दे, शब्द ही बैर हटाए ।
शब्द जोड़ दे टूटे मन, शब्द ही प्यार बढ़ाए ।।

चढ़ते सूरज के
पुजारी तो लाखों हैं
डूबते वक़्त हमने
सूरज को भी तन्हा देखा है।

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