प्रेरणादायक विचार

ढूढेंगे तो रास्ते मिलेंगे

राह पर शायरी, रास्ते पर शायरी

ढूंढोगे अगर तो ही रास्ते मिलेंगे
मंज़िलों की फितरत है खुद चलकर नहीं आती ।

किसी की सलाह से
रास्ते जरूर मिलते हैं
पर मंजिल तो खुद की
मेहनत से ही मिलती है ।

राह पर शायरी

खोजोगे तो हर मंजिल की राह मिल जाएगी
सोचोगे तो हर बात की वजह मिल जाएगी
ज़िन्दगी इतनी भी मजबूर नहीं ये दोस्त
जिगर से जियो तो मौत भी जीने की अदा बन जाएगी।

कभी रिश्तों से रास्ते मिल जाते हैं
और
कभी रास्तों में रिश्ते बन जाते हैं ।

मंजिल चाहे कितनी क्यों ना ऊंची हो,
रास्ता हमेशा पैरों के नीचे ही होता है ।

रास्ते कई लोग आपको दिखायेंगे..
मंजिल तक कोई नही ले जाता !
इसलिए अपना रास्ता खुद चुनो,
क्योंकि सफर आपका है ।

राह पर शायरी और पढ़ें – मंजिल पर पहुँचना हो तो
duniya ke saare raste seedhe

दुनिया के सारे रास्ते सीधे हैं
मुश्किल तो उन्हें होती है
जिनकी चाल ही तिरछी है ।

आसमान में उड़ने वाले
जरा ये खबर भी रख,
जन्नत पहुँचने का रास्ता
मिट्टी से ही गुजरता है !!

मज़िल पाना तो बहुत दूर की बात है,
गरूर में रहोगे, तो रास्ते भी न देख पायोगे ।

सीढियां उनके लिए बनी हैं 
जिन्हें छत पर जाना है
आसमान पर है जिनकी नज़र
उन्हें रास्ता खुद बनाना है ।

नदी जब
किनारा छोड़ देती है
राह की
चट्टान तक तोड़ देती है
बात छोटी सी अगर चुभ जाते है दिल में
ज़िन्दगी के रास्तों को मोड़ देती है ।

परवाह नहीं चाहे जमाना कितना भी खिलाफ हो,
चलूँगा उसी राह पर जो सीधी और साफ हो ।

आशाएँ ऐसी हों जो मंज़िल तक ले जाएँ,
मंज़िल ऐसी हो जो जीवन जीना सीखा दे,
जीवन ऐसा हो जो संबंधों की कदर करे,
और संबंध ऐसे हो जो-याद करने को मजबूर कर दे।

परिंदों को मंज़िल मिलेगी यकीनन
ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं
अक्सर वो लोग खामोश रहते हैं
ज़माने में जिनके हुनर बोलते हैं।

अगर सीखना है दिए से तो
जलना नहीं मुस्कान सीखो
अगर सीखना है सूर्य से तो
डूबना नहीं उठान सीखो
अगर पहुँचना है शिखर पर तो
राह खुद अपनी बनाना सीखो ।

कौन कहता है कि दूरियां
किलोमीटरों में नापी जाती हैं,
खुद से मिलने में भी उम्र गुज़र जाती है ।

रास्ता पूछने में;
शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए,
क्या पता मंजिल का रास्ता;
वहीं से जाता हो जिससे आप बेखबर हों।
अगर रास्ता खूबसूरत है तो;
यह जरूर जानें कि,
वह किस ओर जा रहा है;
लेकिन अगर लक्ष्य खूबसूरत है;
तो रास्ता जैसा भी हो उसकी परवाह न करें।

शुभचिंतक सड़कों पर लगे
सुंदर “लैंप” की तरह होते हैं,
वे हमारी यात्रा की दूरी को तो कम नहीं कर सकते लेकिन
हमारे पथ को “रोशन” और यात्रा को “आसान” करते हैं ।

राह पर शायरी और पढ़ें –

धीरे धीरे ही सही राह पर चलते रहिए

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