अध्यात्म

तू पुकारे और मैं सुन न पाऊँ

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हे ईश्वर!
मुझे इतना नीचे भी मत गिराना
कि मैं पुकारूँ और तू सुन न पाये और
इतना ऊँचा भी मत उठाना कि
तू पुकारे और मैं सुन न पाऊँ ।

मुझे तैरने दे या फिर बहना सिखा दे,
अपनी रजा में अब तू रहना सिखा दे,
मुझे शिकवा न हो कभी भी किसी से,
हे ईश्वर !
मुझे सुःख और दुःख के पार जीना सिखा दे।

मैंने कब चाहा कि
मेरी झोलियाँ ख़ुशी से भर दे;
मगर किसी के आगे;
हाथ न फैलाना पड़े मेरे रब,
मेरी औकात बस इतनी कर दे।

ईश्वर से प्रार्थना हिंदी

सुकून उतना ही देना प्रभु,
जितने से जिंदगी चल जाए,
औकात बस इतनी देना, कि
औरों का भला हो जाए,
रिश्तों में गहराई इतनी हो, कि
प्यार से निभ जाए,
आँखों में शर्म इतनी देना, कि
बुजुर्गों का मान रख पायें,
साँसे पिंजर में इतनी हों, कि
बस नेक काम कर जाएँ,
बाकी उम्र ले लेना, कि
औरों पर बोझ न बन जाएँ ।

हर सुबह उठकर मेरी यही प्रार्थना है प्रभु
रात सुख की बीत गई,
दिन निकला है।
मेरी वाणी से, मेरे हृदय से
मेरी आँखों से, मेरे हाथों से
किसी का बुरा न हो ।

ईश्वर से प्रार्थना

मेरे तीन अपराधों को माफ़ करो..
यह जानते हुए भी कि-
तुम सर्वव्यापी हो, पर
मैं तुम्हें हर जगह खोजता हूँ,
यह मेरा पहला अपराध है..
तुम शब्दों से परे हो, पर
मैं तुम्हें शब्दों से बांधता हूँ,
एक नाम देता हूँ,
यह मेरा दूसरा अपराध है..
तुम सर्वज्ञाता हो,
फिर भी मैं तुम्हें अपनी इच्छाएं बताता हूँ,
उन्हें पूरा करने को कहता हूँ,
यह मेरा तीसरा अपराध है..!!

मेरी प्रार्थना को ऐसे स्वीकार करो मेरे ईश्वर कि
जब-जब सर झुके,
मुझसे जुड़े हर इंसान की जिंदगी सँवर जाए ।

हे ईश्वर! मुझे अधिक लेने के नहीं
अधिक देने के योग्य बनाओ ।

हे प्रभु!
मेरे पैरों में इतनी शक्ति देना कि
दौड़-दौड़ कर आपके दरवाजे आ सकूँ।
मुझे ऐसी सद्बुद्धि देना कि
सुबह-शाम घुटने के बल बैठकर आपको प्रणाम कर सकूँ।
सौ साल जिऊँ या पचास साल यह आपकी मर्जी।
मेरी अर्जी तो सिर्फ इतनी है कि
जब तक जिऊँ, जिह्वा पर आपका नाम रहे,
देने में मेरे हाथ कभी थके नहीं।

मेरे मालिक!
प्रेम से भरी हुई आँखें देना,
श्रद्धा से झुुका हुआ सिर देना,
सहयोग करते हुए हाथ देना,
सत्पथ पर चलते हुए पाँव देना
और सिमरन करता हुआ मन देना।
हे प्रभु! अपने बच्चों को अपनी कृपादृष्टि देना,
सद्बुद्धि देना, पल पल साथ रहना प्रभु ।

ईश्वर से प्रार्थना – जो रास्ता सही हो उसी पर चलाये रखना

ईश्वर से प्रार्थना हिंदी

इतनी मेहरबानी मेरे ईश्वर बनाये रखना।
जो रास्ता सही हो उसी पर
चलाये रखना।
न दिल दुखे किसी का
मेरे शब्दों से,
इतना रहम तू मेरे भगवान मुझे पे बनाये रखना ।

हे प्रभु, मुझे इतना धैर्य दो कि मैं
जिनको नहीं बदल सकता उनको
उसी रूप मै स्वीकार कर लूँ।
मुझे इतनी शक्ति दो कि मैं
उन सभी को बदल दूँ जिनको मैं बदल सकता हूँ और
इतनी बुद्धि दो कि किनको बदल सकता हूँ और
किनको नहीं बदल सकता यह जान सकूँ ।

हे ईश्वर !
तुम सुबह की पहली आराधना हो तो
रात्रि की अंतिम प्रार्थना हो
जीवन का मजबूत तंत्र हो तो
जिन्दगी का बीज मंत्र हो
क्या नही हो ?
भक्ति प्रेम साधना सभी कुछ तो हो तुम ।

ईश्वर से प्रार्थना – इतनी कृपा बनाये रखना

इतनी कृपा मेरे ईश्वर मुझ पर बनाये रखना,
जो मार्ग सच हो उसी पर चलाये रखना,
ना दुखे हृदय किसी का मेरे शब्दों से,
इतनी कृपा हम पर बनाये रखना।

meri aukat se badhkar

मेरी औकात से बढ़कर
मुझे कुछ न  देना मेरे मालिक
क्योंकि जरूरत से ज़्यादा
रोशनी भी
इंसान को अंधा कर देती है ।

हे मालिक ! मेरी गुमराहियाँ,
मेरे दोष देख कर उन्हें अनदेखा कर देना
क्योंकि मैं जिस माहौल में रहता हूँ
उसका नाम दुनिया है।

ईश्वर से प्रार्थना है
सुख हो या दुख हो हमेशा शुक्र मनाऊँ हर हाल में
तुम ही दिल में रहो कभी गलत बात मेरे मन में न आए
भूलकर भी कभी किसी का दिल न दुखाऊं
हर पल मेरे साथ रहो प्रभु
कर्म मेरे ऐसे हों जब भी इस दुनिया से जाऊं
हर किसी की आँख नम हो
हे ईश्वर मुझे हमेशा मेरी औकात मे ही रखना ।

मौन रहकर की गई प्रार्थना ईश्वर तक पहुँचती है

तेज स्वर में की गई प्रार्थना,
ईश्वर तक पहुँचे यह आवश्यक नहीं है,
किन्तु सच्चे मन से की गई प्रार्थना,
जो भले ही मौन रहकर की गई हो,
वह ईश्वर तक अवश्य पहुँचती है ।

हे प्रभु
चाह नहीं मेरी कि
पूरा पथ जान सकूँ
दे प्रकाश इतना कि
हर अगला कदम पहचान सकूँ ।

ईश्वर से प्रार्थना – पकड़ लो हाथ मेरा प्रभु

पकड़ लो हाथ मेरा प्रभु ,
जगत में भीड़ भारी है
कहीं मैं खो न जाऊँ ,
ज़िम्मेदारी ये तुम्हारी है ।

पलकें झुकें और नमन हो जाये,
मस्तक झुके और वंदन हो जाए,
ऐसी नजर कहाँ से लाऊँ कि
तुझे याद करूँ और तेरा दर्शन हो जाए ।

करूँ प्रभु से यही प्रार्थना
रखना सदा दया का हाथ
जब भी पुकारूँ नाम तेरा
देना हर घड़ी मेरा साथ ।

चलते-चलते मेरे कदम अक्सर यही सोचते हैं, कि
किस तरफ जाऊँ, जो तू मुझे मिल जाये ।

इतनी ऊँचाई न देना प्रभु की धरती पराई लगने लगे,
इतनी खुशियाँ न देना कि किसी के दुःख पे हँसी आने लगे,
नहीं चाहिए ऐसी शक्ति जिसका निर्बल पर प्रयोग करूँ,
नहीं चाहिए ऐसा भाव की किसी को देख जल-जल मरूँ,
ऐसा ज्ञान मुझे न देना अभिमान जिसका होने लगे,
ऐसी चतुराई भी न देना कि लोगो को छलने लगे ।

ईश्वर से प्रार्थना ऐसे करो

प्रार्थना ऐसे करो
जैसे सब कुछ
भगवान पर
निर्भर करता है
और कोशिश
ऐसीे करो कि
जैसे सब कुछ
खुद पर निर्भर है ।

ईश्वर से प्रार्थना आभार के लिए होना चाहिए

प्रार्थना कुछ मांगने के लिए नहीं;
बल्कि ईश्वर ने जो कुछ दिया है;
उसके लिए उसका आभार;
व्यक्त करने के लिए होना चाहिए।

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