अध्यात्म

मैं हर बार आजमाता हूँ

ईश्वर पर स्टेटस

मैं हर बार आजमाता हूँ कि
ईश्वर है कि नहीं पर
उसने एक बार भी सबूत नहीं माँगा कि
मैं इन्सान हूँ कि नहीं।

हे ईश्वर ! शिकायत रोज करता हूँ कि
तू मेरे साथ रहे पर
खुद को तेरे काबिल बनाना
रोज भूल जाता हूँ।

ईश्वर पर स्टेटस

तू करता वही है, जो तू चाहता है।
होता वही है, जो मैं चाहता हूँ।
तू वही कर, जो मैं चाहता हूँ।
फिर होगा वही, जो तू चाहता है।

“ईश्वर” से शिकायत क्यों है ?
ईश्वर ने पेट भरने की जिम्मेदारी ली है,
पेटियां भरने की नहीं ।

प्रभु के सामने जो झुकता है,
वह सबको अच्छा लगता है,
लेकिन जो सबके सामने झुकता है,
वह प्रभु को भी अच्छा लगता है।

नहीं चाहता किसी का खास बनना ।
तेरा बनके रह जाऊँ, इतना ही काफी है ।

प्रेम गाँधारी बना देता है और भक्ति संजय ।

मनुष्य के समक्ष अप्रकट रहना चुना ईश्वर ने
क्योंकि, संयोग की शक्ति से उच्च है वियोग की भक्ति ।

जो कुछ है तेरे दिल में, सब उसको ख़बर है,
बन्दे तेरे हर हाल पर भगवान शिव की नज़र है ।

तुम्हारे साथ चलते-चलते ये जाना मैंने
जीवन इतना भी कठिन नहीं है, ईश्वर ।

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