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Tag Archives: लफ़्ज़

Bol Meethe Na Ho

बोल मीठे न हों तो

बोल मीठे न हों तो हिचकियाँ भी नहीं आतीं; कीमती मोबाइलों पर घंटियाँ भी नहीं आती; घर बड़ा हो या छोटा, गर मिठास न हो तो; इंसान तो क्या चीटियाँ भी नहीं आतीं । मीठे बोल बोलिए; क्योंकि; अल्फाजों में जान होती है, इन्हीं से आरती, अरदास और अजान होती है, ये दिल के समंदर के वो मोती हैं, जिनसे …

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