सुविचार

रिश्तों के मायाजाल में एक रिश्ता

रिश्तों के मायाजाल में
एक रिश्ता नीम के पेड़ जैसा रखना
सीख वो कड़वी भले ही दे
पर तकलीफ में वो ठंडी छाँव तो देता ही है।

रिश्तों की माला जब टूटती है तो
दोबारा जोड़ने से छोटी हो ही जाती है,
क्योंकि
कुछ जज्बात के मोती बिखर ही जाते हैं ।

कैसे खिलेंगे रिश्तों के फूल,
अगर ढूंढते रहेंगे एक-दूसरे की भूल ।

रिश्ते पैसों के मोहताज़ नहीं होते क्योकि
कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते पर
जीवन अमीर जरूर बना देते है ।

रिश्तों को शर्तों से और शर्तों को जज्बातों से बाँधना,
यही एक वो भूल है ,जो रिश्तों को पनपने ही नहीं देती ।

आप अकेले बोल तो सकते है;
परन्तु…
बातचीत नहीं कर सकते ।
आप अकेले आनन्दित हो सकते है
परन्तु…
उत्सव नहीं मना सकते।
अकेले आप मुस्करा तो सकते है
परन्तु…
हर्षोल्लास नहीं मना सकते.
हम सब एक दूसरे
के बिना कुछ नहीं हैं;
यही रिश्तों की खूबसूरती है ।

रिश्ता बारिश जैसा नहीं होना चाहिए,
जो बरस कर खत्म हो जाए
बल्कि
रिश्ता हवा की तरह होना चाहिये,
जो खामोश हो मगर सदैव आस पास हो।

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