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muskan aur madad

मुस्कान और मदद

“मुस्कान” और “मदद” ये दोनों
ऐसे इत्र है
जिन्हें जितना अधिक दूसरो पर छिड़केंगे
उतना ही अधिक सुगंध आपके अन्दर आयेगी ।

कौन किसी से क्या लेता है,
कौन किसी को क्या देता है;
थोड़ा सा हँस लेते हैं,
थोड़ा सा हँसा देते हैं,
दोस्ती में यही तो होता है,
हँसना और हँसाना
कोशिश है मेरी,
हर कोई खुश रहे,
यह चाहत है मेरी ,
भले ही मुझे कोई याद करे
या न करे,
लेकिन हर अपने को याद
करना आदत है मेरी ।




देखना कभी नम न हो घर के बुजर्गों की आँखें,
छत से पानी टपके तो दीवारें कमज़ोर होती हैं ।

अन्तर्मन में संघर्ष
और फिर भी
मुस्कुराता हुआ चेहरा ,
यही जीवन का श्रेष्ठ अभिनय है ।

मंदिर मस्जिद जाने से तो
मजहब में ईमान फँसेगा ,
एक खिलौना देकर देखो
‘बच्चे में भगवान’ हँसेगा

प्रेम एक प्रार्थना है
जिसके पीछे सब हैं कतार में
कोई शब्‍दों से व्‍यक्‍त करता है
तो कोई मौन रहकर
प्रेम
बंसी के बजने में हो जाता है
धुन मीठी
तो कई बार हो जाता है प्रेम
विष के प्‍याले में अमृत
प्रेम एक आहट है
जो बिना किसी पद़चाप के
शामिल हो जाता है जिंदगी में
धड़कनों का अहसास बनकर
प्रेम विश्‍वास है
जब भी साथ होता है
पूरा अस्तित्‍व प्रेममय हो जाता है ।
सुप्रभात