सुविचार

सम्बन्ध जोड़ना एक कला है

संबंध जोड़ना एक कला है,
लेकिन;
संबंध को निभाना;
एक साधना है ।
जिंदगी में हम कितने सही;
और कितने गलत हैं
ये सिर्फ दो ही जानते हैं;
ईश्वर“और अपनी “अंतरआत्मा
और
हैरानी की बात है कि
दोनों नजर नहीं आते।

संबंध कभी भी सबसे जीतकर नहीं निभाए जा सकते…
संबंधों की खुशहाली के लिए
झुकना होता है,
सहना होता है,
दूसरों को जिताना होता है और
स्वयं हारना होता है।

झुकने से रिश्ता हो गहरा,
तो झुक जाना चाहिए
हर बार आपको ही झुकना पड़े,
तो रुक जाना चाहिए ।
सच्चा संबंध ही वास्तविक पूँजी है ।

सख़्त हाथों से भी फ़िसल जाती हैं
कभी नाज़ुक अंगुलियाँ,
रिश्ते ‘ज़ोर’ से नहीं
प्यार मोहब्बत” से पकड़े जाते हैं ।

नाराज़गी को कुछ देर
चुप रह कर
मिटा लिया करो,
ग़लतियों पर बात करने से
रिश्ते उलझ जाते हैं..!!

संबंध अनमोल हैं
हर किसी से उम्मीद न करें
क्योंकि हर कोई
दिल का मोल नहीं जानता ।

जो बांधने से बंधे और तोड़ने से टूट जाए
उसका नाम है ………..बंधन
जो अपने आप बन जाए और जीवन भर न टूटे
उसका नाम है ………..संबंध

सभी शब्दों का अर्थ
मिल सकता है
परन्तु
जीवन का अर्थ जीवन जी कर और
संबंध का अर्थ संबंध निभाकर ही
मिल सकता है ।

अपने संबंधों को बारिश की तरह मत बनायें
जो आई और गई
बल्कि संबंध ऐसे बनायें
जो हवा की तरह
सदैव अंग-संग रहें ।

परायों को अपना बनाना
उतना मुश्किल नहीं,
जितना अपनों को
अपना बनाए रखना ।

लोग अफ़सोस से कहते हैं कि;
कोई किसी का नहीं है;
लेकिन कोई यह नहीं सोचता कि;
हम किसके हुए ।

कौआ किसी का धन नहीं चुराता;
फिर भी लोगों को वह प्रिय नहीं है;
कोयल किसी को धन नहीं देती;
फिर भी लोगों को वह प्रिय है;
फर्क सिर्फ मीठी बोली का है;
जिससे सब अपने बन जाते है ।

परखो तो कोई अपना नहीं
समझो तो कोई पराया नहीं ।

व्यवहार घर का कलश
और इंसानियत घर की तिजोरी 
कहलाती है।
मधुर वाणी घर की धन-दौलत
और शांति घर की लक्ष्मी
कहलाती है।
पैसा घर का मेहमान
और एकता घर की ममता
कहलाती है।
व्यवस्था घर की शोभा
और समाधान ही घर का सच्चा सुख
कहलाता है ।

एक सुखद जीवन के लिए,
मस्तिष्क में सत्यता,
होठों पर प्रसन्नता और
हृदय में पवित्रता जरूरी हैं।

तालाब सदा कुएँ से
सैंकड़ों गुना बड़ा होता है
फिर भी लोग कुएँ का ही पानी पीते हैं;
क्योंकि;
कुएँ में गहराई और शुद्धता होती है ।
मनुष्य का बड़ा होना अच्छी बात है;
लेकिन उसके व्यक्तित्व में गहराई और;
विचारों में शुद्धता भी होनी चाहिए;
तभी वह महान बनता है ।

बड़प्पन वह गुण है;
जो पद से नहीं संस्कारों;
से प्राप्त होता है।
जिसका मन मस्त है;
उसके पास समस्त है ।
च्चा संबंध ही वास्तविक पूँजी है ।

दो बातों की गिनती करना छोड़ दीजिए;
खुद का दु:ख;
और दूसरे का सुख;
ज़िन्दगी आसान हो जाएगी ।

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