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जरूरत के नियम पर चलता है

जरूरत के नियम पर चलता है संसार

संसार जरूरत के नियम पर चलता है।
सर्दियो में जिस सूरज का इंतजार होता है,
उसी सूरज का गर्मियों में तिरस्कार भी होता है।
आप की कीमत तब होगी जब आपकी जरुरत होगी।
जरूरत के नियम पर चलता है, संसार
अगर लोग सिर्फ जरूरत पर ही
आपको याद करते हैं,
तो उन्हें गलत मत समझिये,
क्योंकि
आप उनकी जिन्दगी की वो
रोशनी की किरण हैं
जो उन्हें सिर्फ,
अन्धेरों में ही दिखाई देती है.
जरूरत के नियम पर चलता है
साँप घर पर दिखाई दे,
तो लोग डंडे से मारते हैं
और शिवलिंग पर दिखाई दे तो सम्मान करते हैं ।
लोग सम्मान आपका नहीं
आपकी स्थिति और स्थान का करते हैं ।
जरूरत के नियम पर चलता है
पायल हजारों रूपये में आती है,
पर पैरो में पहनी जाती है;
और;
बिंदी 1 रूपये में आती है;
मगर माथे पर सजाई जाती है;
इसलिए कीमत मायने नहीं रखती;
उसका कृत्य मायने रखता है ।

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