सुविचार

सच खुद अपना वकील होता है

झूठ
बेवजह दलील देता है;
सच,
खुद अपना वकील होता है ।

दिलों को तौलनेवाले,
अभी कुछ लोग बाकी हैं.
मोहब्बत घोलने वाले,
अभी कुछ लोग बाकी हैं.
यकीनन झूठ है, बस झूठ है,
बस झूठ दुनिया में,
मगर सच बोलने वाले,
अभी कुछ लोग बाकी हैं ।

बस ज़रा स्वाद में कड़वा है,
नहीं तो सच का कोई जवाब नहीं।

सच बोलने से रिश्ते टूटते हैं और
झूठ बोलने से मैं खुद।

देर से बोला गया सत्य कभी-कभी झूठ के बराबर हो जाता है।

सत्य की ख्वाहिश होती है कि
सब उसे पहचानें और
झूठ को हमेशा डर लगता है कि
कोई उसे पहचान न ले।

झूठ में
आकर्षण होता है,
पर
स्थिरता
सत्य में ही होती है ।

झूठ बोलने पर
झूठ याद रखने होते हैं
जबकि सच बोलने पर
कोई बात याद नहीं रखनी पड़ती है ।

सच्चे किस्से शराब खाने में सुने
वो भी हाथ मे जाम लेकर,
झूठे किस्से अदालत में सुने
वो भी हाथ मे गीता-कुरान लेकर

रख लो आईने तसल्ली के लिए पर
सच के लिए तो आंखें ही मिलानी पड़ेंगी ।

सच वह दौलत है
जिसे पहले खर्च करो और
ज़िन्दगी भर आनंद उठाओ और
झूठ वह क़र्ज़ है
जिससे क्षणिक सुख पाओ और
ज़िन्दगी भर चुकाते रहो ।

और पढ़िए –

सच और झूठ

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