अध्यात्म

प्रीत की डोरी टूटने न देना

लगाया जो भक्ति का रंग
उसे छूटने न देना
श्री कृष्ण तेरी याद का दामन
कभी छूटने न देना
हर साँस में तुम और
तुम्हारा नाम रहे
प्रीत की यह डोरी
कभी टूटने न देना।

सारे जग को देने वाले मैं क्या तुझको भेंट चढ़ाऊँ,
जिसके नाम से आए खुशबू मैं क्या उसको फूल चढ़ाऊँ,
वो तैरते-तैरते डूब गये जिन्हें खुद पर गुमान था।
और वो डूबते-डूबते भी तर गये जिन पर तू मेहरबान था।

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मैं हर बार आजमाता हूँ
प्रीत की डोरी टूटने न देना
इतनी कृपा बनाये रखना
भगवद गीता, प्रत्येक अध्याय एक वाक्य में
सब तुम्हारा है तुम सबके हो
ईश्वर पर भरोसा रखिए
उसका नाम दुनिया है
औकात से बढ़ कर
रब की मेहरबानी
प्रभु को मौन पाते हैं
पलकें झुकें और नमन हो जाये
तलाश न कर मुझे
अगला कदम पहचान सकूं
तू पुकारे और मैं सुन न पाऊँ
तू मिलता सिर्फ उन्ही को है
कोई कहे ये तेरा है 
कोई तो है जो फैसला करता है
प्रभु का दीदार – प्रार्थना

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