अध्यात्म

पलकें झुकें और नमन हो जाये

पलकें झुकें और नमन हो जाये,
मस्तक झुके और वंदन हो जाए,
ऐसी नजर कहाँ से लाऊँ कि
तुझे याद करूँ और तेरा दर्शन हो जाए

कन्हैया तुम्हारी झलक चाहते है…
—–जो झपके न ऐसी पलक चाहते है…
तुम्हारे खयालो में बीते ये जीवन…
—–तुम्हारे ही चरणो में होए मगन हम…
तुम्हे देखने की ललक चाहते है…
——कन्हैया तुम्हारी झलक चाहते है…
नहीं रौशनी चाँद सूरज की चाहते…
——नहीं चांदनी की माला ही बाटे…
तुम्हारे मुकुट की चमक चाहते है…
——थकू न कभी श्याम गुण तेरे गाते…
ये संसार के गीत अब न सुहाते…
——नुपुर की बस अब झनक चाहते है…
सब कुछ है तेरा तुम प्रियतम मेरे हो…
——बेबस से फिर काहे ऐसे अलग हो…
मिटे न कभी वो तलब चाहते है…
——कन्हैया तुम्हारी झलक चाहते है…
।। जय श्री कृष्णा ।।*।। राधे राधे ।।*।।

और पढ़ें : 

मैं हर बार आजमाता हूँ
प्रीत की डोरी टूटने न देना
इतनी कृपा बनाये रखना
राह दे कृष्ण
भगवद गीता, प्रत्येक अध्याय एक वाक्य में
सब तुम्हारा है तुम सबके हो
ईश्वर पर भरोसा रखिए
उसका नाम दुनिया है
औकात से बढ़ कर
रब की मेहरबानी
प्रभु को मौन पाते हैं
तलाश न कर मुझे
अगला कदम पहचान सकूं
तू पुकारे और मैं सुन न पाऊँ
तू मिलता सिर्फ उन्ही को है
कोई कहे ये तेरा है 

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