अध्यात्म

औकात से बढ़ कर

मेरी औकात से बढ़कर
मुझे कुछ न  देना मेरे मालिक
क्योंकि जरूरत से ज़्यादा
रोशनी भी
इंसान को अंधा कर देती है ।

Meri Aukat Se Badhkar
Mujhe Kuchh Na Dena Mere Malik
Kyonki Jaroorat Se Jyada Roshni Bhi
Insan Ko Andha Bana Deti Hai.

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