अध्यात्म

मैं हर बार आजमाता हूँ

Main Har Bar Aajmata Hoon Ki
Eshwar Hai Ki Nahi Par
Usne Ek Baar Bhi Saboot Nahin Manga Ki
Main Insan Hoon Ki Nahi

मैं हर बार आजमाता हूँ कि
ईश्वर है कि नहीं पर
उसने एक बार भी सबूत नहीं माँगा कि
मैं इन्सान हूँ कि नहीं।

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सब तुम्हारा है तुम सबके हो
ईश्वर पर भरोसा रखिए
उसका नाम दुनिया है
औकात से बढ़ कर
रब की मेहरबानी
प्रभु को मौन पाते हैं
पलकें झुकें और नमन हो जाये
तलाश न कर मुझे
अगला कदम पहचान सकूं
तू पुकारे और मैं सुन न पाऊँ
तू मिलता सिर्फ उन्ही को है
कोई कहे ये तेरा है 
कोई तो है जो फैसला करता है
प्रभु का दीदार – प्रार्थना

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