अध्यात्म

कोई तो है जो फैसला करता है

कोई तो है जो फैसला करता है
पत्थरों के मुकद्दर का
किसे ठोकरों पर रहना है
किसे भगवान् होना है

जरूर कोई तो लिखता होगा… 
कागज और पत्थर का भी नसीब… 
वरना ये मुमकिन नहीं कि…
कोई पत्थर ठोकर खाये और
कोई पत्थर भगवान बन जाये…
और कोई कागज रद्दी और
कोई कागज गीता बन जाये ।

हुनर सड़कों पर तमाशा करता है
और किस्मत महलों में राज करती है ।

सोचने वाली बात ….
यदि गलत चाबी से
ताला नहीं खुलता तो
गलत कामों से
स्वर्ग का ताला कैसे खुलेगा ।

जन्म निश्चित है
मरण निश्चित है
कर्म अच्छे हैं
तो स्मरण निश्चित है ।

ये नादानी भी सच में बेमिशाल है
अंधेरा है दिल में;
और मंदिरों में दिया जलाते हैं ।

आए हो निभाने जब किरदार जमीं पर;
कुछ ऐसा कर चलो कि ज़माना मिशाल दे ।

दो जहां के बीच फर्क
सिर्फ एक साँस का है,
चल रही तो यहाँ,
रुक गई तो वहाँ ।
सुप्रभात

मन्नत के धागे बाँधो,
या मुरादों कि पर्ची
वो देगा तभी;
जब होगी उसकी मर्जी ।

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