अध्यात्म

कोई तो है जो फैसला करता है

परमात्मा पर सुविचार, परमात्मा पर अनमोल वचन

कोई तो है जो फैसला करता है
पत्थरों के मुकद्दर का
किसे ठोकरों पर रहना है
किसे भगवान् होना है

जरूर कोई तो लिखता होगा
कागज और पत्थर का नसीब
वरना ये मुमकिन नहीं कि
कोई पत्थर ठोकर खाये और कोई पत्थर भगवान बन जाये
कोई कागज रद्दी और कोई कागज गीता बन जाये ।

हुनर सड़कों पर तमाशा करता है
और किस्मत महलों में राज करती है ।

माटी का संसार है, खेल सके तो खेल ।
बाजी रब के हाथ है, पूरा विज्ञान फेल ।

सोचने वाली बात ….
यदि गलत चाबी से
ताला नहीं खुलता तो
गलत कामों से
स्वर्ग का ताला कैसे खुलेगा ।

परमात्मा पर अनमोल वचन

कहते हैं जिन्‍दगी का आखिरी ठिकाना
ईश्वर का घर है,
कुछ अच्‍छा कर ले मुसाफिर
किसी के घर खाली हाथ नहीं जाते है।

प्रभु न दंड देते है, प्रभु न माफ करते है,
वह तो कर्म-फल के तराजू है…
जो बस इंसाफ करते है
सुख-दुख का बटन तेरे हाथ में है बन्‍दे,
तुम उसे खुद ही ऑन करते हो और ऑफ करते हो
ईश्‍चर के न्‍याय की चक्‍की धीमी जरूर चलती है
पर पीसती बहुत बारीक है।

जन्म निश्चित है
मरण निश्चित है
कर्म अच्छे हैं
तो स्मरण निश्चित है ।

ये नादानी भी सच में बेमिसाल है
अंधेरा है दिल में;
और मंदिरों में दिया जलाते हैं ।

आए हो निभाने जब किरदार जमीं पर;
कुछ ऐसा कर चलो कि ज़माना मिशाल दे ।

दो जहां के बीच फर्क
सिर्फ एक साँस का है,
चल रही तो यहाँ,
रुक गई तो वहाँ ।

उस दिन हमारी सारी परेशानियाँ ख़त्म हो जायेगी,
जिस दिन हमें यकीन हो जाएगा की हमारा
सारा काम ईश्वर की मर्जी से होता है ।

मन्नत के धागे बाँधो,
या मुरादों कि पर्ची
वो देगा तभी;
जब होगी उसकी मर्जी ।

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