अध्यात्म

इतनी कृपा बनाये रखना

इतनी कृपा तू ठाकुर हम पर बनाये रखना,
जो रास्ता सही हो…उस पर चलाये रखना,
दिल न दुखे किसी का इस जग में मेरे कारण,
ऐसी कृपा तू मालिक सदा ही बनाये रखना..

हे प्रभु!
मेरे पैरों में इतनी शक्ति देना कि
दौड़-दौड़ कर आपके दरवाजे आ सकूँ।
मुझे ऐसी सद्बुद्धि देना कि
सुबह-शाम घुटने के बल बैठकर आपको प्रणाम कर सकूँ।
सौ साल जिऊँ या पचास साल यह आपकी मर्जी।
मेरी अर्जी तो सिर्फ इतनी है कि
जब तक जिऊँ, जिह्वा पर आपका नाम रहे,
देने में मेरे हाथ कभी थके नहीं।
मेरे मालिक!
प्रेम से भरी हुई आँखें देना,
श्रद्धा से झुुका हुआ सिर देना,
सहयोग करते हुए हाथ देना,
सत्पथ पर चलते हुए पाँव देना
और सिमरन करता हुआ मन देना।
हे प्रभु! अपने बच्चों को अपनी कृपादृष्टि देना,
सद्बुद्धि देना, पल पल साथ रहना प्रभु ।

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प्रभु को मौन पाते हैं
पलकें झुकें और नमन हो जाये
तलाश न कर मुझे
अगला कदम पहचान सकूं
तू पुकारे और मैं सुन न पाऊँ
तू मिलता सिर्फ उन्ही को है
कोई कहे ये तेरा है 
कोई तो है जो फैसला करता है
प्रभु का दीदार – प्रार्थना

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