अध्यात्म

भगवद गीता, प्रत्येक अध्याय एक वाक्य में

भगवद गीता – प्रत्येक अध्याय एक वाक्य में

भगवद गीता-bhagwad-geeta

भगवद गीता अध्याय 1 : जीवन की सिर्फ एक समस्या – गलत सोच

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गीता अध्याय 2 : हमारी सभी समस्यायों का अंतिम समाधान – सही ज्ञान

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भगवद गीता अध्याय 3 : प्रगति और समृद्धि का एक ही रास्ता – निस्वार्थता

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गीता अध्याय 4 : प्रत्येक कार्य – प्रार्थना जैसा

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भगवद गीता अध्याय 5 : अहम् में नहीं अनंत के परमानन्द में डूबें 

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गीता अध्याय 6 : निरंतर उच्च चेतना से जुड़ें

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गीता अध्याय 7 : जो सीखें, वही जियें

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गीता अध्याय 8 : स्वयं से कभी हार मत मानो

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भगवद गीता अध्याय 9 : अपनी खूबियों का मान करें

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गीता अध्याय 10 : अपने आसपास दिव्यता को अनुभव करें

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गीता अध्याय 11 : सत्य को जानने का हर संभव प्रयास करें

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गीता अध्याय 12 : मन को श्रेष्ठता में तल्लीन करें

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गीता अध्याय 13 : माया से परे होकर दैवत्व से जुड़ें

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गीता अध्याय 14 : जीवन शैली वही जियें – जो स्वयं के दृष्टिकोण से सही हो

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गीता अध्याय 15 : दिव्यता को सदैव प्राथमिकता दें

भगवद गीता-bhagwad-geeta-chepter16

भगवद गीता अध्याय 16 : अच्छा होना स्वयं एक पुरुस्कार है

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गीता अध्याय 17 : सुखद और सही का चयन ही आपकी शक्ति है

भगवद गीता-bhagwad-geeta-chepter18

गीता अध्याय 18 : चलो परमात्मा के सानिध्य में चलें

और पढ़ें : 

मैं हर बार आजमाता हूँ
प्रीत की डोरी टूटने न देना
इतनी कृपा बनाये रखना
राह दे कृष्ण
सब तुम्हारा है तुम सबके हो
उसका नाम दुनिया है
औकात से बढ़ कर
रब की मेहरबानी
प्रभु को मौन पाते हैं
पलकें झुकें और नमन हो जाये
तलाश न कर मुझे
अगला कदम पहचान सकूं
तू पुकारे और मैं सुन न पाऊँ
तू मिलता सिर्फ उन्ही को है
कोई कहे ये तेरा है 
कोई तो है जो फैसला करता है
प्रभु का दीदार – प्रार्थना

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