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zindagi tujhse har kadam samjhauta

ज़िंदगी तुझसे हर कदम समझौता


ज़िंदगी तुझसे हर कदम;
समझौता क्यों किया जाए;
शौक जीने का है मगर;
इतना भी नहीं कि;
मर मर के जिया जाए ।

Zindagi Tujhse Har Kadam;
Samjhauta Kyon Kiya Jaye;
Sahuk Jeene Ka Hai Magar;
Itna Bhi Nahi Ki;
Mar Mar Ke Jiya Jaye.

ज़िंदगी चाहे एक दिन की हो
या चाहे चार दिन की,
उसे ऐसे जियो जैसे कि
ज़िन्दगी तुम्हें नहीं मिली
ज़िन्दगी को तुम मिले हो ।

यूँ तो कुछ शिकायत नहीं है,
ज़िन्दगी तुझसे
बस कभी-कभी इक rewind और
delete बटन की कमी खलती है।

“क्या लिखूँ ,
अपनी जिंदगी के बारे में दोस्तों ,
वो लोग ही बिछड़ गए,
जो जिंदगी हुआ करते थे” !!

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