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zindagi ke 2 padav

ज़िंदगी के दो पड़ाव

ज़िन्दगी के दो पड़ाव
अभी उम्र नहीं है
अब उम्र नहीं है ।

क्या खूब रंग दिखाती है ज़िन्दगी
क्या इत्तेफ़ाक़ होता है,
प्यार में उम्र नहीं होती,
पर हर उम्र में प्यार होता है।

ख्वाइशें कुछ यूँ भी अधूरी रही ,
पहले उम्र नहीं थी अब उम्र नहीं रही।

उम्र ढलने पर
समझ में ज़िन्दगी आने लगी
जब सिमटने लग गए पर,
आसमाँ खुलने लगा ।

बचपन साथ रखियेगा
ज़िन्दगी की शाम में
उम्र महसूस ही नहीं होगी
सफर के मुकाम में।

उम्र को अगर हराना है तो
शौक जिन्दा रखिये,
घुटने चलें या न चलें
मन उड़ता परिंदा रखिये।

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