अनमोल वचन

मिलते वक्त इतना मत झुको

लोगों से मिलते वक्त इतना मत झुको, कि उठते वक्त सहारा लेना पड़े।

हम झुकते हैं,
क्योंकि हमें रिश्ते निभाने का शौक है
वरना गलत तो हम कल भी नहीं थे
और आज भी नहीं हैं।

झुकना बहुत अच्छी बात है
जो नम्रता की पहचान है पर
आत्म सम्मान खोकर झुकना
खुद को खोने के समान है ।

लोगों को भरपूर सम्मान दीजिये
इसलिए नहीं कि उनका अधिकार है
बल्कि इसलिए कि आप में संस्कार हैं ।

नम्रता की नरम मिट्टी में ही सम्मान का अंकुर फूटता है ।

कद बढ़ा नहीं करते ,ऐड़ियाँ उठाने से,
ऊँचाईयाँ तो केवल मिलती हैं, सर झुकाने से।

सारा जहाँ उसी का है जो मुस्कुराना जानता है,
रौशनी भी उसी की है जो शमा जलाना जानता है
हर जगह मंदिर हैं लेकिन भगवान तो उसी का है
जो सर झुकाना जानता है।

उम्र में, ओहदे में कौन कितना बड़ा है
फर्क नहीं पड़ता,
लहज़े में कौन कितना झुकता है ?
फर्क ये पड़ता है।

रिश्ते मोतियों की तरह होते होते हैं
कोई गिर भी जाये तो झुक कर उठा लेना चाहिए।

श्रद्धा ज्ञान देती है,
नम्रता मान देती है और
योग्यता स्थान देती है।
पर तीनों मिल जायें तो,
व्यक्ति को हर जगह सम्मान देती हैं।

आंधिया
हसरत से अपना
सिर पटकती रह गयी,
बच गए वो पेड़
जिनमे हुनर
झुकने का था

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