अनमोल वचन

पुरुष से पिता

पुरुष से पिता तक का सफर

पत्नी जब स्वयं माँ बनने का समाचार सुनाये और वो खबर सुन,
आँखों से खुशी के आँसू टप-टप गिरने लगे
तब …..
आदमी…..पुरुष से पिता बनता है ।

नर्स द्वारा कपड़े में लिपटा कुछ पाउण्ड का दिया जीव,
जवाबदारी का प्रचण्ड बोझ का अहसास कराये
तब …..
आदमी…..पुरुष से पिता बनता है ।

रात-आधी रात, जागकर पत्नी के साथ, बेबी का डायपर बदलता है,
और बच्चे को कमर में उठा कर घूमता है,
उसे चुप कराता है, पत्नी को कहता है तू सो जा मैं इसे सुला दूँगा।
तब …..
आदमी…..पुरुष से पिता बनता है ।

मित्रों के साथ घूमना, पार्टी करना जब नीरस लगने लगे और
पैर घर की तरफ बरबस दौड़ लगाये
तब …..
आदमी…..पुरुष से पिता बनता है ।

“हमने कभी लाईन में खड़ा होना नहीं सीखा” कह, ब्लैक में टिकट लेने वाला,
बच्चे के स्कूल में दाखिले का फॉर्म लेने हेतु पूरी ईमानदारी से सुबह 4 बजे से लाईन में खड़ा होने लगे
तब …..
आदमी…..पुरुष से पिता बनता है ।

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