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ज़रा मुस्कुराना भी सिखा दे ऐ ज़िंदगी

ज़रा मुस्कुराना भी सिखा दे ऐ ज़िंदगी

ज़रा मुस्कुराना भी सिखा दे ऐ ज़िंदगी,
रोना तो पैदा होते ही सीख लिया था ।

सुगन्ध के बिना पुष्प,
तृप्ति के बिना प्राप्ति, ध्येय के बिना कर्म
एवं
प्रसन्नता के बिना जीवन व्यर्थ है।

हर कोई चाहता है
मुस्कराहटें सजाएँ,
सजाएँ बिलकुल,
बस किसी और के
चेहरे से न चुराएँ ।

अनुकूलता में
हर कोई मुस्कुरा लेता है,
पर जो प्रतिकूलता में भी
जो मुस्कुराना सीख जाता है
वह धरती का
सबसे सुखी इंसान बन जाता है।

कभी झगड़ा, कभी मस्ती
कभी आँसू, कभी हँसी
छोटा सा पल, छोटी छोटी ख़ुशी
एक प्यार की कश्ती और
ढेर सारी मस्ती,
बस इसी का नाम तो है दोस्ती ।

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हक़ीक़त जिंदगी की, ठीक से जब जान जाओगे, ख़ुशी में रो पड़ोगे और गमों में मुस्कुराओगे ।

बिंदास मुस्कुराओ क्या ग़म है

हँस कर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का

मुस्कुराना ज़िंदगी है

कुछ हँस के बोल दिया करो

कल किसने देखा है

ज़िंदगी मिली है जीने के लिए

हँसता हुआ चेहरा

हँसते हुए लोगों की संगत

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