Home / अनमोल वचन / गृहस्थी को कुछ ऐसे बचा लिया
गृहस्थी को कुछ ऐसे बचा लिया

गृहस्थी को कुछ ऐसे बचा लिया


गृहस्थी को अपनी कुछ ऐसे बचा लिया,
कभी आँखें दिखा दी, कभी सर झुका लिया ।
आपसी नाराजगी को कभी लंबा चलने ही नहीं दिया,
कभी वो हँस पड़े, कभी मैं मुस्कुरा दिया ।
रूठ कर बैठे रहने से भला घर कब चलते हैं,
कभी उन्होंने गुदगुदा दिया, कभी मैंने मना लिया ।
खाने पीने पे विवाद कभी होने ही नहीं दिया,
कभी गरम खा ली और कभी बासी से काम चला लिया।
मियाँं हो या बीवी महत्व में कोई कम नहीं ,
कभी खुद डॉन बन गए, कभी उन्हें बॉस बना दिया ।

“सभी शादीशुदा जोड़ो को समर्पित”

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.